Thursday, February 19, 2026

ईरान के मुद्दे पर अमेरिकी विदेश मंत्री कर सकते हैं नेतन्याहू से मुलाकात, सप्ताह के अंत तक हमले की चर्चा तेज


नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू 28 फरवरी को मुलाकात कर सकते हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी है। इजरायली मीडिया ने बताया कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका डिप्लोमैटिक और मिलिट्री तैयारियां तेज कर रहा है। अमेरिका ने इस हफ्ते के अंत तक ईरान पर हमले की तैयारियों के संकेत दिए हैं।

इस हफ्ते जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे राउंड की बैठक हुई। इस दौरान अमेरिका की तरफ से चिंताएं सामने रखी गईं। इन चिंताओं को दूर करने के लिए एक लिखित प्रपोजल तैयार करने पर ईरान ने हामी भरी है। एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि इस डॉक्यूमेंट का मकसद तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बड़े टकराव से बचने के लिए कदमों की आउटलाइन बनाना है।

विदेश सचिव मार्को रुबियो अमेरिकी नीतियों में समन्वय बिठाने में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं। रुबियो ट्रंप की सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी हैं।

इजरायली मीडिया के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को व्हाइट हाउस सिचुएशन रूम में ईरान पर चर्चा करने के लिए मीटिंग की। उन्हें बताया गया कि पोटेंशियल मिलिट्री ऑपरेशन के लिए जरूरी “सभी फोर्स” मार्च के मध्य तक तैनात होने की उम्मीद है।

आई24 ने सीबीएस न्यूज के हवाले से बताया कि वरिष्ठ अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने ट्रंप को बताया कि मिलिट्री इस हफ्ते के अंत तक ईरान पर स्ट्राइक करने के लिए तैयार हो सकती है, हालांकि कोई भी कार्रवाई शायद शनिवार या रविवार के बाद भी हो सकती है। इस पर ट्रंप ने अभी तक कोई आखिरी फैसला नहीं किया है।

सीबीएस न्यूज ने बताया कि स्टैंडर्ड पेंटागन की प्लानिंग के हिस्से के तौर पर कुछ अमेरिकी कर्मचारियों को अगले कुछ दिनों में मिडिल ईस्ट से बाहर ले जाया जा सकता है ताकि किसी पोटेंशियल ऑपरेशन या ईरान की तरफ से जवाबी कार्रवाई से पहले उन्हें उपयुक्त जगहों पर भेजा जा सके।

इससे पहले इजरायली प्रधानमंत्री अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने के लिए अमेरिका पहुंचे थे। इस दौरान नेतन्याहू ने कहा था कि ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर भविष्य में होने वाले किसी भी समझौते में तेहरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं और हमास और हिज्बुल्लाह जैसे क्षेत्रीय प्रॉक्सी के लिए फंडिंग पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

–आईएएनएस

केके/वीसी


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