नई दिल्ली, 18 फरवरी (आईएएनएस)। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने म्यांमार में चल रहे ह्यूमन ट्रैफिकिंग और साइबर फ्रॉड रैकेट के एक बड़े मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। चार्जशीट में एक फरार चीनी नागरिक भी शामिल है। यह मामला हरियाणा पुलिस से एनआईए ने अपने हाथ में लिया था और अब स्पेशल कोर्ट, पंचकूला (हरियाणा) में दायर किया गया है।
आरोपियों की पहचान अंकित कुमार उर्फ अंकित भारद्वाज, इश्तिखार अली उर्फ अली और लिसा (चीनी नागरिक, फरार) के रूप में हुई है। चार्जशीट में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं और इमिग्रेशन एक्ट की धारा के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
एनआईए की जांच (केस आरसी-23/2025/एनआईए/डीएलआई) में सामने आया कि ये आरोपी और उनके साथी एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा थे, जो कमजोर आर्थिक स्थिति वाले भारतीय युवाओं को विदेश में नौकरी का लालच देकर म्यांमार के म्यावाडी इलाके में ट्रैफिकिंग करते थे। आरोपी अंकित कुमार और इश्तिखार अली थाईलैंड में ‘पक्की नौकरी’ का झांसा देकर युवाओं को फंसाते थे। वे फरार आरोपी लिसा के साथ मिलकर ऑनलाइन इंटरव्यू का इंतजाम करते थे और पीड़ितों को विश्वास दिलाते थे कि उन्हें थाईलैंड में अच्छी सैलरी वाली नौकरी मिलेगी।
भारत से पीड़ितों को गैर-कानूनी तरीके से थाईलैंड बॉर्डर के रास्ते म्यांमार पहुंचाया जाता था। म्यांमार पहुंचने पर युवाओं को साइबर स्कैम सेंटरों में कैद कर लिया जाता था। उन्हें मजबूरन नकली सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के नागरिकों से संपर्क करने और फर्जी क्रिप्टोकरेंसी ऐप्स में निवेश के लिए लुभाने का काम करवाया जाता था। यदि कोई पीड़ित मना करता, तो उसे यातनाएं दी जातीं, कैद रखा जाता और काम जारी रखने के लिए मजबूर किया जाता। रिहाई के लिए भी भारी फिरौती मांगी जाती थी।
एनआईए ने जांच में पाया कि यह रैकेट दक्षिण-पूर्व एशिया में सक्रिय कई क्रिमिनल सिंडिकेट से जुड़ा हुआ है, जिसमें भारतीय, थाई और चीनी एजेंट शामिल हैं। ट्रैफिकिंग के शिकार युवा मुख्य रूप से हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से थे, जो बेरोजगारी और आर्थिक तंगी का शिकार थे।
–आईएएनएस
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