Wednesday, February 18, 2026

47 साल पहले सहारा मरुस्थल में पहली बार हुई थी बर्फबारी, प्रकृति ने पढ़ाया अनोखा पाठ


नई दिल्ली, 17 फरवरी (आईएएनएस)। रेत के अंतहीन टीलों, तपती धूप और शुष्क हवाओं के लिए प्रसिद्ध गर्म सहारा मरुस्थल में 18 फरवरी 1979 को कुछ ऐसा हुआ जो अकल्पनीय था। अल्जीरिया के दक्षिण-पश्चिमी शहर ऐन सेफरा में अचानक बर्फबारी हुई और कुछ समय के लिए सुनहरे टीलों पर सफेद परत जम गई। दुनिया के सबसे गर्म रेगिस्तानों में से एक में यह दृश्य अपने आप में ऐतिहासिक था।

सहारा मरुस्थल लगभग 92 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है और उत्तरी अफ्रीका के कई देशों तक विस्तृत है। यहां दिन के समय तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच सकता है। ऐसे क्षेत्र में बर्फ गिरना जलवायु विज्ञान की दृष्टि से दुर्लभ माना जाता है। 1979 की इस घटना के दौरान तापमान अचानक शून्य के आसपास पहुंच गया, जिससे वर्षा की बूंदें बर्फ में बदल गईं।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उस समय भूमध्यसागर की दिशा से ठंडी और नम हवाएं उत्तरी अफ्रीका की ओर बढ़ीं। जब ये हवाएं सहारा क्षेत्र की ठंडी ऊंचाई वाले हिस्सों से टकराईं, तो वायुमंडलीय दबाव और तापमान में गिरावट के कारण हिमपात संभव हुआ। हालांकि यह बर्फ कुछ ही घंटों में पिघल गई, लेकिन इसकी तस्वीरें और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान आज भी ऐतिहासिक रिकॉर्ड का हिस्सा हैं।

अल्जीरिया का ऐन सेफरा शहर, जिसे “रेगिस्तान का द्वार” भी कहा जाता है, एटलस पर्वतमाला के निकट स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति ने भी इस असामान्य मौसम घटना में भूमिका निभाई। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान अपेक्षाकृत कम हो सकता है, जिससे अत्यधिक परिस्थितियों में बर्फ गिरने की संभावना बनती है।

1979 की इस बर्फबारी को सहारा में दर्ज पहली महत्वपूर्ण हिमपात घटनाओं में गिना जाता है। इसके बाद 2016, 2018 और 2021 में भी इसी क्षेत्र में हल्की बर्फबारी की खबरें सामने आईं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि अत्यधिक शुष्क क्षेत्रों में भी विशेष परिस्थितियों में मौसम अप्रत्याशित रूप ले सकता है।

यह घटना जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में भी चर्चा का विषय रही है। हालांकि 1979 की बर्फबारी को सीधे तौर पर आधुनिक जलवायु परिवर्तन से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं माना जाता, लेकिन यह उदाहरण दिखाता है कि पृथ्वी की जलवायु प्रणाली कितनी जटिल और परिवर्तनशील है।

सहारा मरुस्थल की 1979 की बर्फबारी केवल एक दुर्लभ प्राकृतिक घटना नहीं थी, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी थी कि प्रकृति अपने स्थापित पैटर्न से हटकर भी चौंकाने का माद्दा रखती है।

–आईएएनएस

केआर/


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