मास्को, 16 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ईस्ट यूरोप यात्रा के दूसरे दिन बुडापेस्ट में हैं। उनकी मौजूदगी में यूएस-हंगरी के बीच अहम डील हुई। विदेश मंत्री रुबियो और प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की, जहां रुबियो ने कई मुद्दों पर अमेरिकी नीति की खूबियां गिनाईं।
मार्को रुबियो और हंगरी के विदेश मंत्री ने ट्रंप द्वारा घोषित नागरिक-परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए। अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थक देशों में से एक को रुबियो ने समझाने का प्रयास किया कि कैसे उनके पक्ष में यूएस ने खास फैसले लिए।
रुबियो ने कहा कि यूएस ने पिछले साल हंगरी को रूसी तेल और गैस इस्तेमाल करने पर यूएस बैन से एक साल की छूट इसलिए दी थी क्योंकि ट्रंप और प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन के बीच रिश्ते मजबूत थे।
“यह उस व्यक्तिगत रिश्ते की वजह से था, क्योंकि हम चाहते हैं कि यह इकॉनमी आगे बढ़े, हम चाहते हैं कि यह देश अच्छा करे। यह हमारे देश के हित में है, खासकर जब तक आप प्रधानमंत्री और इस देश के लीडर हैं।”
दरअसल, 2022 में यूक्रेन पर रूस के बड़े पैमाने पर हमले की शुरुआत के बाद से हंगरी ने रूसी एनर्जी पर अपनी निर्भरता बनाए रखी है, जिससे कई ईयू और नाटो सहयोगियों ने इसकी आलोचना की थी। रुबियो ने बड़ी खूबसूरती से दबे शब्दों में अमेरिका के सहयोग और पश्चिम के उन्हें नकारने की आदत का जिक्र किया।
यूएस के विदेश मंत्री से सवाल ईरान और चीन को लेकर भी पूछा गया। जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री ने माना कि उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और ऐसा करना पागलपन होगा।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रसूख, शांति स्थापित करने की उनकी सोच और दुनिया के सबसे बेहतरीन डीलर बताने की पूरी कोशिश मार्को रुबियो ने हंगरी में की। प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन के साथ संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया और जटिल सवालों का जवाब भी दिया।
चीन के साथ अदावत और दोस्ती को लेकर पूछे सवाल पर रुबियो बोले, “हम दुनिया के किसी भी देश से यह नहीं कह रहे हैं कि वह खुद को किसी से अलग कर ले। हम समझते हैं कि दुनिया के हर देश को अपने भूगोल, अपनी अर्थव्यवस्था, अपने इतिहास, और अपने भविष्य की चुनौतियों की सच्चाई से निपटना पड़ता है। हम ज़ाहिर तौर पर पार्टनर्स और दोस्तों के साथ कुछ चीजों को लेकर अपनी चिंताएं शेयर करेंगे।”
इसके बाद उन्होंने चीन के साथ अपने ट्रेड और रिश्तों पर कहा कि यूनाइटेड स्टेट्स के राष्ट्रपति अप्रैल में चीन जा रहे हैं। क्यों? क्योंकि चीन एक बड़ा देश है, वहां एक अरब से ज्यादा लोग रहते हैं, वह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकॉनमी है, और उनके पास न्यूक्लियर वेपन हैं। यूनाइटेड स्टेट्स और चीन के बीच रिश्ते न होना और एक-दूसरे से बातचीत न करना पागलपन होगा।
फिर उन्होंने माना कि दोनों देशों के बीच मतभेद हैं लेकिन वो ऐसे हैं जिन्हें मैनेज किया जा सकता है।
इससे पहले हंगरी के पीएम ने मंच से राष्ट्रपति ट्रंप के दौर में हुए समझौतों और दोनों देशों के बीच सहज होते रिश्तों पर बात की। कहा कि अमेरिका ने हंगरी में 17 निवेश किए जो महत्वपूर्ण था। इसके साथ ही उन्होंने इस नई दोस्ती को दोनों देशों के लिए स्वर्णिम युग की शुरुआत बताया।
उनके बाद रुबियो ने भी स्वर्णिम युग की शुरुआत बताते हुए अमेरिका के खुले विचारों, दुनिया में शांति व्यवस्था और स्थिरता की कामना वाली बात कही। रुबियो ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर किए जा रहे प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि हम एकमात्र ऐसे देश हैं जो स्पष्ट रूप से दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर ला सकते हैं।
वहीं उन्होंने ईरान को कट्टर धार्मिक देश बताया जिससे डील करना बेहद टेढ़ी खीर है। लेकिन माना कि ‘लेकिन हम कोशिश कर रहे हैं।’
–आईएएनएस
केआर/
