Friday, February 13, 2026

इन फिल्मों ने दिखाई रेडियो की ताकत, एम्बी से सुलु तक पेश किए कई यादगार आरजे के किरदार


मुंबई, 13 फरवरी (आईएएनएस)। रेडियो का जादू आज भी किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म से कम नहीं है। रेडियो ने समय के साथ अपनी ताकत बनाए रखी है। खास बात यह है कि बॉलीवुड ने भी अपनी फिल्मों में रेडियो को सिर्फ तकनीक या पेशे के रूप में नहीं, बल्कि एक भावनात्मक साथी और कहानी को आगे बढ़ाने वाले माध्यम के रूप में दिखाया है। कुछ ऐसी फिल्म हैं, जिन्होंने रेडियो को पर्दे पर अपनी आवाज दी।

‘सलाम नमस्ते’ – 2005 में आई फिल्म ‘सलाम नमस्ते’ ने रेडियो को एक नई पहचान दी। इस फिल्म में प्रीति जिंटा ने अम्बर मल्होत्रा या एम्बी का किरदार निभाया। एम्बी रेडियो पर श्रोताओं की दोस्त बनकर उनके दिल की बातें सुनती थी। फिल्म ने यह दिखाया कि रेडियो जॉकी का काम केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होता, बल्कि लोगों के लिए एक भरोसेमंद साथी भी बनता है। उस समय एफएम युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय था और इस फिल्म ने रेडियो की सामाजिक भूमिका को बड़े पर्दे पर पेश किया।

‘लगे रहो मुन्नाभाई’ – 2006 में आई फिल्म ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ ने रेडियो के सामाजिक असर को दिखाया। इस फिल्म में विद्या बालन ने जान्हवी का किरदार निभाया, जो रेडियो शो होस्ट थी। उनका शो लोगों तक गांधीजी के विचार पहुंचाने का माध्यम बनता है। फिल्म ने दिखाया कि रेडियो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की ताकत रखता है। इस फिल्म में संजय दत्त का किरदार भले ही रेडियो जॉकी का नहीं था, लेकिन रेडियो के जरिए कहानी में अहम भूमिका निभाई। ‘गांधीगिरी’ का संदेश रेडियो के माध्यम से लोगों तक पहुंचा और यह साबित हुआ कि यह माध्यम किसी भी विचार को फैलाने में बेहद प्रभावशाली हो सकता है।

‘गुजारिश’ – 2010 में आई फिल्म ‘गुजारिश’ में ऋतिक रोशन ने एथन मैस्करेनहास का किरदार निभाया। एथन एक हादसे के बाद अपने जीवन में बदलाव लाता है और रेडियो जॉकी बन जाता है। उनके लेट-नाइट शो में श्रोताओं के लिए भावनाओं और शायरी का समंदर होता है। यह किरदार दिखाता है कि रेडियो आवाज के माध्यम से दिलों से कैसे जुड़ सकता है और लोगों की भावनाओं को समझ सकता है।

‘तुम्हारी सुलु’ – 2017 में आई फिल्म ‘तुम्हारी सुलु’ में विद्या बालन ने एक और यादगार रेडियो जॉकी का किरदार निभाया। इस बार वह एक सामान्य गृहिणी सुलु के रूप में नजर आई थीं, जो रेडियो जॉकी के तौर पर जॉब करती है। उनके शो में श्रोता अपने दिल की बातें उनसे खुलकर साझा करते थे और उन्हें लगता है कि उनके पास एक दोस्त है, जो उनकी सुनता है और उन्हें समझता है।

–आईएएनएस

पीके/एबीएम


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