Friday, February 13, 2026

विश्व रेडियो दिवस: पीएम मोदी ने रेडियो को बताया 'विश्वसनीय आवाज', कहा- ये सभी लोगों को जोड़ता है


नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर रेडियो की स्थायी प्रासंगिकता और परिवर्तनकारी शक्ति पर प्रकाश डाला और इसे एक “विश्वसनीय आवाज” बताया जो दूरदराज के गांवों और हलचल भरे शहरों में लोगों को समान रूप से जोड़ती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “विश्व रेडियो दिवस एक ऐसे माध्यम का जश्न मनाने का दिन है जो दूरदराज के गांवों से लेकर हलचल भरे शहरों तक, लोगों की विश्वसनीय आवाज है। वर्षों से, रेडियो समय पर जानकारी देता रहा है, प्रतिभा को निखारता रहा है और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करता रहा है। यह दिन इस माध्यम से जुड़े सभी लोगों के प्रयासों को स्वीकार करने का दिन है।”

प्रधानमंत्री ने अपने मासिक रेडियो संबोधन ‘मन की बात’ पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे यह कार्यक्रम नागरिकों के साथ सीधे संवाद के लिए एक अद्वितीय मंच के रूप में विकसित हुआ है।

पीएम ने आगे कहा, “मन की बात के माध्यम से मैंने रेडियो की उस क्षमता का प्रत्यक्ष अनुभव किया है जिसके द्वारा यह हमारे लोगों की सामाजिक शक्ति को उजागर कर सकता है। इस महीने का कार्यक्रम रविवार, 22 फरवरी को प्रसारित होगा। कार्यक्रम के लिए अपने सुझाव अवश्य साझा करें।”

प्रधानमंत्री की टिप्पणियां संचार के सबसे गतिशील, प्रतिक्रियाशील और आकर्षक माध्यमों में से एक के रूप में रेडियो के निरंतर महत्व को रेखांकित करती हैं।

तेजी से हो रहे तकनीकी विकास और डिजिटल प्लेटफार्मों के प्रसार के बावजूद, रेडियो ने सहजता से खुद को अनुकूलित कर लिया है, और श्रोताओं को भाग लेने और जुड़ने के नए और इंटरैक्टिव तरीके प्रदान कर रहा है।

भारत में, राष्ट्रीय प्रसारक और प्रमुख सार्वजनिक सेवा प्रसारक ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर), विश्व के सबसे बड़े प्रसारण संगठनों में से एक है। इसकी घरेलू सेवा में देश भर में 400 से अधिक स्टेशन शामिल हैं, जो भारत के लगभग 92 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र और कुल जनसंख्या के 99.19 प्रतिशत तक पहुंचते हैं। प्रसारक 23 भाषाओं और 146 बोलियों में कार्यक्रम प्रसारित करता है, जो देश की समृद्ध भाषाई विविधता को दर्शाता है।

रेडियो एक शक्तिशाली और कम लागत वाले संचार उपकरण के रूप में काम करता रहता है, जो विशेष रूप से दूरस्थ समुदायों और समाज के कमजोर वर्गों तक पहुंचने के लिए उपयुक्त है, जिसमें निरक्षर, विकलांग व्यक्ति, महिलाएं, युवा और आर्थिक रूप से वंचित समूह शामिल हैं।

–आईएएनएस

एसएके/एएस


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