Wednesday, February 11, 2026

अमेरिका ने भारत को इंडो-पैसिफिक का एंकर बताया


वॉशिंगटन, 11 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका ने भारत को दक्षिण एशिया और पश्चिमी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का एक अहम और भरोसेमंद देश बताया है। ट्रंप प्रशासन ने कहा कि उसकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत भारत के साथ व्यापार समझौते, रक्षा सहयोग, और इस क्षेत्र में खास निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा।

दक्षिण और मध्य एशिया के सहायक सचिव पॉल कपूर ने हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी की साउथ और सेंट्रल एशिया पर सब-कमेटी के सामने पेश एक लिखित बयान में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति यह साफ करती है कि वॉशिंगटन को ‘अमेरिका को सबसे पहले’ रखना चाहिए और ऐसा दुनिया के जरूरी हिस्सों के साथ सक्रिय जुड़ाव के जरिए करना चाहिए।

हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी की दक्षिण और मध्य एशिया पर सब-कमेटी के सामने पेश होने से एक दिन पहले कपूर ने कहा, “राष्ट्रपति के नेतृत्व में हमें आर्थिक और सुरक्षा की दृष्टि से फायदा हुआ है, साथ ही हमारे साझेदारों को भी मदद मिली है।”

उन्होंने दक्षिण एशिया को बहुत जरूरी बताते हुए कहा कि अकेले भारत में एक बिलियन से ज्यादा लोग रहते हैं और यह उपमहाद्वीपीय क्षेत्र में फैला हुआ है।

कूपर ने चेतावनी दी कि दक्षिण एशिया पर हावी होने वाली कोई दुश्मन ताकत दुनिया की अर्थव्यवस्था पर जबरदस्ती का असर डाल सकती है। अमेरिका को ऐसा होने से रोकना चाहिए और इस इलाके को आजाद और खुला रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत अपने आकार, जगह और एक आजाद और खुले इलाके के लिए प्रतिबद्धता के साथ, दक्षिण एशिया और, बड़े पैमाने पर, इंडो-पैसिफिक के पश्चिमी हिस्से का आधार है।

कूपर ने बढ़ते द्विपक्षीय सहयोग की ओर इशारा किया, जिसमें उच्च-स्तर राजनयिक जुड़ाव और रक्षा, तकनीक, और ऊर्जा में सहयोग शामिल है।

उन्होंने नए 10-साल के यूएस-इंडिया रक्षा फ्रेमवर्क अनुबंध, ट्रस्ट इनिशिएटिव और अमेरिकी उत्पादों की भारत द्वारा खरीद का जिक्र किया जिसमें ड्रोन से लेकर लिक्विफाइड नेचुरल गैस तक शामिल हैं।

कपूर ने हाल में व्यापार संबंधी घटनाओं पर भी रोशनी डालते हुए कहा कि पिछले सप्ताह ही राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी एक ऐतिहासिक व्यापार अनुबंध पर पहुंचे। दो दिन पहले, ट्रंप प्रशासन ने बांग्लादेश के साथ एक व्यापार अनुबंध साइन किया। इससे अमेरिकी निर्यात को बांग्लादेश का बाजार मिलेगा।

व्यापार के अलावा, उन्होंने ‘रणनीतिक-क्षमता निर्माण’ के तीन बड़े अप्रोच, रक्षा सहयोग, लक्षित निवेश, और डिप्लोमेसी का जिक्र किया।

पाकिस्तान को एक और जरूरी साझेदार बताते हुए, कपूर ने कहा कि वाशिंगटन इस्लामाबाद के साथ मिलकर अपने जरूरी संसाधनों की क्षमता को समझने के लिए काम कर रहा है, जिसमें यूएस सरकार की सीड फाइनेंसिंग को निजी क्षेत्र की जानकारी के साथ जोड़ा जा रहा है।

उन्होंने ऊर्जा और खेती में बढ़ते व्यापार का भी जिक्र करते हुए कहा कि बांग्लादेश, नेपाल, मालदीव, श्रीलंका और भूटान अपनी रणनीतिक स्थानों की वजह से बहुत ज्यादा अहमियत रखते हैं, लेकिन वे जबरदस्ती का लक्ष्य बन सकते हैं।

कूपर ने डेट-ट्रैप डिप्लोमेसी के खतरों के बारे में भी चेतावनी देते हुए कहा कि आइए, “इस इलाके में रणनीतिक क्षमता बनाने के लिए मिलकर काम करें, अपने साझेदारों को खुद की मदद करने में मदद करें, और अमेरिका को ज्यादा सुरक्षित, मजबूत और खुशहाल बनाएं।”

दक्षिण एशिया वॉशिंगटन की इंडो-पैसिफिक रणनीति का केंद्र बना हुआ है, खासकर तब जब अमेरिका इस इलाके में चीन के बढ़ते आर्थिक और सुरक्षा फुटप्रिंट का मुकाबला करना चाहता है। रक्षा सहयोग, मल्टीलेटरल ग्रुपिंग, और बढ़े हुए व्यापार सहयोग के जरिए भारत इस कोशिश में एक अहम साझेदार के तौर पर उभरा है।

–आईएएनएस

पीएके/एएस


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