Sunday, February 15, 2026

बलूचिस्तान में बड़ी खुफिया नाकामी के बाद पाक सेना प्रमुख मुनीर की चुप्पी: रिपोर्ट


क्वेटा, 6 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने एक बार फिर ऐसे घटनाक्रम को “सुरक्षा बलों की जीत” बताकर पेश किया है, जिस पर शर्मिंदगी होनी चाहिए। एक रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान में जिसे जीत बताया जा रहा है, वह दरअसल पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और सेना की बड़ी खुफिया नाकामी थी, क्योंकि वे बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) की गतिविधियों का समय रहते पता लगाने में विफल रहे।

यूरेशिया रिव्यू में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, 30 जनवरी को बीएलए ने ‘ऑपरेशन हेरोफ 2.0’ शुरू किया, जिसके तहत बलूचिस्तान के नौ जिलों के कई शहरों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाया गया।

रिपोर्ट में सेवानिवृत्त भारतीय सेना अधिकारी निलेश कुंवर ने लिखा कि सैकड़ों लड़ाकों से जुड़े इतने बड़े अभियान के लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से व्यापक समन्वय, साथ ही हमलों से पहले बीएलए कैडरों की बड़े पैमाने पर आवाजाही और एकत्रीकरण जरूरी था। इसके बावजूद आईएसआई और सेना का इसे पहचानने में असफल रहना निस्संदेह एक गंभीर खुफिया चूक है। उन्होंने सवाल उठाया कि पाकिस्तान में वर्दीधारियों से सवाल करने की हिम्मत आखिर कौन करता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑपरेशन हेरोफ 2.0 ने बीएलए लड़ाकों की दृढ़ इच्छाशक्ति और मौत को गले लगाने की तैयारी को उजागर किया। इस अभियान में महिला बलूच लड़ाकों की भी भागीदारी बताई गई है। बीएलए ने ‘हिट एंड रन’ रणनीति के बजाय आबादी वाले इलाकों पर नियंत्रण किया और अंत तक लड़ाई लड़ी। क्षेत्र से सामने आए दृश्यों में आम लोगों को बीएलए लड़ाकों के साथ घुलते-मिलते और उनका समर्थन करते देखा गया, जिससे पाकिस्तानी सेना के उस दावे को चुनौती मिलती है कि बलूच सशस्त्र समूह नागरिकों को आतंकित करते हैं।

निलेश कुंवर ने सवाल उठाया कि देश के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्स (सीडीएफ) के रूप में फील्ड मार्शल मुनीर को कई कठिन प्रश्नों के जवाब देने चाहिए। अगर पाकिस्तानी सेना का दावा है कि बलूचिस्तान के लोग उनके साथ हैं, न कि सशस्त्र बलूच समूहों के, तो फिर सेना इन समूहों को काबू में क्यों नहीं कर पा रही? यदि सशस्त्र समूह स्थानीय लोगों को डराते हैं, तो बीएलए द्वारा जारी वीडियो फुटेज में नागरिकों का उनके साथ खुले तौर पर मेलजोल कैसे समझाया जाएगा?

उन्होंने यह भी पूछा कि जब मुनीर ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि “हम इन [बलूच] आतंकियों को बहुत जल्द करारा जवाब देंगे,” तो फिर बीएलए इतना बड़ा अभियान कैसे चला पाई? और यदि पाकिस्तानी नेतृत्व के आरोपों के अनुसार सशस्त्र बलूच समूहों को नई दिल्ली का समर्थन हासिल है, तो खुद को दुनिया की सबसे बेहतरीन जासूसी एजेंसी बताने वाली आईएसआई इस कथित कड़ी को तोड़ने में असहाय क्यों दिख रही है?

–आईएएनएस

डीएससी


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