Saturday, February 14, 2026

राज्यसभा में डीएमके सांसद बोले- श्रीलंकाई नौसेना मछुआरों से करती है अमानवीय व्यवहार, कच्चातिवु द्वीप की वापसी हो


नई दिल्ली, 4 फरवरी (आईएएनएस)। राज्यसभा में बुधवार को श्रीलंकाई नौसेना की ओर से भारतीयों, विशेषकर तमिलनाडु के मछुआरों को गिरफ्तार किए जाने और उनके साथ कथित अमानवीय व्यवहार का मुद्दा उठाया गया। यह विषय द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के सांसद तिरुचि शिवा ने सदन में उठाया। उन्होंने सदन में कहा कि कच्चातिवु द्वीप की वापसी ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।

तिरुचि शिवा ने सदन को बताया कि श्रीलंका की नौसेना गलती से समुद्री सीमा पार करने वाले भारतीय मछुआरों के साथ बेहद अमानवीय व्यवहार करती है। मछुआरों की नाव जब्त कर ली जाती है और यह ऐसा नियमित रूप से हो रहा है। उन्होंने कहा कि वे पिछले दो दशकों से लगातार इस मुद्दे को संसद में उठाते आ रहे हैं, लेकिन चाहे केंद्र में कोई भी सरकार रही हो, अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

उन्होंने कहा कि यह कोई एक बार की घटना नहीं है, बल्कि यह समस्या लगातार और बिना रुके जारी है। डीएमके सांसद ने बताया कि तमिलनाडु के रामेश्वरम और अन्य तटीय इलाकों के मछुआरे पूरी तरह मछली पकड़ने पर निर्भर हैं। उनके पास आजीविका का कोई दूसरा साधन नहीं है। जब वे समुद्र में मछली पकड़ने जाते हैं, तो अनजाने में एक अदृश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा पार हो जाती है। ऐसे में श्रीलंका की नौसेना उन्हें पकड़ लेती है।

सांसद ने आरोप लगाया कि श्रीलंका की नौसेना भारतीय मछुआरों के साथ मारपीट, यातना और अमानवीय व्यवहार करती है व उन्हें लंबे समय तक हिरासत में रखा जाता है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। मछुआरों की नावें भी जब्त कर ली जाती हैं, जिससे उनकी आजीविका पूरी तरह खत्म हो जाती है।

तिरुचि शिवा ने कहा कि तमिलनाडु सरकार बार-बार केंद्र सरकार को पत्र लिखती है और विदेश मंत्री भी हस्तक्षेप करते हैं। इसके बाद कुछ मछुआरों को रिहा किया जाता है, लेकिन हर बार कुछ लोग हिरासत में रह जाते हैं। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में भारतीय मछुआरों की नावें अब भी श्रीलंका की हिरासत में हैं।

उन्होंने सदन को यह भी बताया कि एक मामले में मछुआरों को 15 दिनों तक बेहद दयनीय हालात में रखा गया। भारतीय दूतावास के अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें तौलिए और अन्य जरूरी सामान मिल सका। इससे पहले उनके साथ अत्यंत क्रूर और अमानवीय व्यवहार किया गया।

तिरुचि शिवा ने कहा कि ये सभी मछुआरे तमिल और भारतीय नागरिक हैं। सरकार को इस मुद्दे को हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समस्या को लेकर तमिलनाडु में भारी आक्रोश है, प्रदर्शन हो रहे हैं और जनता को समझाना मुश्किल हो रहा है।

समाधान पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा को बदला नहीं जा सकता, लेकिन केंद्र सरकार को या तो श्रीलंका सरकार पर कड़ा दबाव बनाना चाहिए ताकि मछुआरों पर अत्याचार बंद हों, या फिर कच्चातिवु द्वीप की वापसी ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे का जल्द से जल्द स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि मछुआरों की पीड़ा खत्म हो और तटीय इलाकों में शांति बहाल हो सके।

–आईएएनएस

जीसीबी/डीसीएच


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