लखनऊ, 28 जनवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश और जापान के बीच पर्यटन एवं संस्कृति सहयोग को लेकर एक नई और बहुआयामी पहल की शुरुआत होती दिख रही है। वेलनेस टूरिज्म, गोल्फ जैसे खेल पर्यटन, क्यूजीन एक्सचेंज, बौद्ध विरासत, साहित्यिक एवं ज्ञान आधारित पर्यटन को केंद्र में रखकर दोनों पक्षों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर गहन मंथन हुआ।
यह चर्चा यामानाशी प्रांत से आए जापानी प्रतिनिधिमंडल और उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच लखनऊ में हुई उच्चस्तरीय बैठक में हुई, जिसकी अध्यक्षता पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने की। बैठक में जयवीर सिंह ने कहा कि भारत और जापान के रिश्तों की असली ताकत संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत में निहित है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन और संस्कृति भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को दीर्घकालिक और स्थायी आधार प्रदान कर सकते हैं। मंत्री ने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश की बौद्ध विरासत वैश्विक स्तर पर विशिष्ट है, क्योंकि भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े सभी प्रमुख स्थल—सारनाथ, कुशीनगर और कपिलवस्तु—इसी राज्य में स्थित हैं।
जयवीर सिंह ने यह भी संकेत दिया कि अप्रैल या मई 2025 में जापान में ‘यूपी फेस्टिवल’ आयोजित किए जाने पर गंभीरता से विचार चल रहा है। यह आयोजन जापान में उत्तर प्रदेश की संस्कृति, परंपरा और पर्यटन क्षमता को प्रस्तुत करने का प्रभावी मंच बनेगा।
पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि जापान की ‘इकिगाई’, ‘वाबी-साबी’, ‘जेन’ और ‘जाजेन’ जैसी अवधारणाएं भारतीय सभ्यतागत सोच से गहरा साम्य रखती हैं। उन्होंने कहा कि वेलनेस, दर्शन और पर्यटन के क्षेत्र में आपसी सहयोग दोनों देशों के लोगों के लिए समृद्ध अनुभव लेकर आएगा। उन्होंने आगरा, लखनऊ और वाराणसी में उपलब्ध गोल्फ कोर्स का उल्लेख करते हुए खेल पर्यटन की संभावनाओं पर भी जोर दिया।
अमृत अभिजात ने कहा कि अब पर्यटन केवल होटल और दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि क्यूरेटेड अनुभव, व्यंजन आधारित यात्राएं, साहित्यिक संवाद और लर्निंग टूरिज्म नए आयाम बन चुके हैं। उन्होंने टूर ऑपरेटर्स से जापानी पर्यटकों के लिए विशेष पैकेज तैयार करने की अपील की।
यामानाशी प्रांत के उप-राज्यपाल जुनिची इशिडेरा ने कहा कि दिसंबर 2024 में हुए एमओयू के बाद से उत्तर प्रदेश और यामानाशी के बीच संवाद लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि यामानाशी प्रांत, जापान में उत्तर प्रदेश के लिए ‘गेटवे’ के रूप में काम करेगा। अगस्त 2025 में लगभग 200 सदस्यों का एक जापानी प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश आएगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग को नई गति मिलेगी।
–आईएएनएस
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