Wednesday, January 28, 2026

राष्ट्रपति का संबोधन देश की विकास यात्रा का मार्गदर्शन करेगा: प्रधानमंत्री मोदी


नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। संसद के बजट सत्र की शुरुआत बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संयुक्त सदनों को संबोधित करने के साथ हुई। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह संबोधन आने वाले महीनों में देश की विकास यात्रा का मार्गदर्शन करेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “संसद का बजट सत्र बुधवार को राष्ट्रपति के दोनों सदनों को दिए गए प्रेरणादायक भाषण के साथ शुरू हुआ। हमारी संसदीय परंपराओं में इस भाषण का खास महत्व है, क्योंकि यह उस नीतिगत दिशा और सामूहिक संकल्प को बताता है जो आने वाले महीनों में हमारे देश की विकास यात्रा का मार्गदर्शन करेगा।”

उन्होंने आगे लिखा, “आज का भाषण व्यापक और जानकारीपूर्ण था। इसमें हाल के समय में भारत की शानदार विकास यात्रा की झलक दिखी और साथ ही भविष्य के लिए एक साफ दिशा भी दिखाई दी।”

पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “विकसित भारत बनाने पर जोर को बहुत अच्छे से बताया गया, जो एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की हमारी साझा आकांक्षा को दर्शाता है। भाषण में कई विषयों को भी शामिल किया गया, जिसमें किसानों, युवाओं, गरीबों और पिछड़े लोगों के लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला गया। इसने सुधारों को और गति देने, नवाचार व सुशासन पर विशेष बल देने की हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराया है।”

इससे पहले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने अभिभाषण में सरकार की उपलब्धियों को गिनाया और कई अहम योजनाओं की प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि सरकार दलितों, पिछड़ों, वंचितों और जनजातीय समाज के लिए पूरी संवेदनशीलता से काम कर रही है। ‘सबका साथ-सबका विकास’ का विजन देश के हर नागरिक के जीवन में सकारात्मक प्रभाव ला रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि साल 2014 की शुरुआत में सिर्फ 25 करोड़ नागरिकों तक ही सोशल सिक्योरिटी की योजनाएं पहुंच पाती थीं। सरकार के प्रयासों में निरंतरता की वजह से आज करीब 95 करोड़ भारतीयों को सोशल सिक्योरिटी का कवच मिला है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा, “संतोष है कि आज देश के युवा, किसान, श्रमिक और उद्यमी विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका का लगातार विस्तार कर रहे हैं। बीते साल के उत्साहवर्धक आंकड़े इसका प्रमाण हैं।”

–आईएएनएस

डीसीएच/


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