Monday, January 26, 2026

पद्मश्री संतूर वादक पंडित तरुण भट्टाचार्य ने शास्त्रीय संगीत को दिया नया आयाम


कोलकाता, 26 जनवरी (आईएएनएस)। पंडित तरुण भट्टाचार्य को कला के क्षेत्र में पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया। वे पश्चिम बंगाल के कोलकाता से हैं।

पंडित तरुण भट्टाचार्य संतूर वादक और संगीत के क्षेत्र में नवप्रवर्तक हैं। उन्होंने नए रागों और शैलियों की रचना की और संतूर के लिए मानका (फाइल ट्यूनर) का आविष्कार किया, जिससे इसे उच्च स्तर की सटीकता के साथ ट्यून किया जा सकता है।

पं. तरुण भट्टाचार्य ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए पद्मश्री से सम्मानित होने पर भारत सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन पर कहा कि उन्होंने चार वर्ष की आयु में संतूर सीखना शुरू किया था। उनका कहना है कि संगीत ही दुनिया में शांति लाने का एकमात्र साधन है।

उन्होंने कहा कि सबसे पहले भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहुत-बहुत आभार। मैं अपने आप को बहुत भाग्यशाली समझता हूं कि मुझे इस अवार्ड के लिए चुना गया। अवार्ड एक तरह की प्रेरणा है, जिसने मुझे और ज्यादा काम करने के लिए प्रेरित किया है। मैं अवार्ड को एक जिम्मेदारी की तरह ले रहा हूं। मुझसे लोगों को उम्मीदें जुड़ी हैं, और लोग मेरी तरफ देख रहे हैं, तो जाहिर है मुझे और ज्यादा मेहनत और काम करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि मैंने चार साल की उम्र से संतूर सीखना शुरू किया। मेरे पिता भी संगीतकार (सितारवादक) थे। मेरे पहले गुरु मेरे पिता रहे और बाद में मैंने भारत रत्न पंडित रविशंकर से भी सीखा। अभी मेरी उम्र 67 साल है। इस हिसाब से मैं पिछले 63 साल से प्रैक्टिस में हूं।

उन्होंने कहा कि मैं शुरुआत से ही कुछ अलग करना चाहता था। मैं चाहता था जो स्टाइल मार्केट में नहीं है, मुझे वो करना है। मैं लोगों को कॉपी नहीं करना चाहता था। गुरु जी की कृपा से मैंने बहुत कुछ सीखा। संतूर को एक विशुद्ध क्लासिकल साज मैं बनाना चाहता था, जिसमें मैं काफी हद तक सफल भी हुआ। मैं चाहता था कि मैहर स्टाइल में संतूर बजे। मैं मैहर घराने से ताल्लुक रखता हूं। हम स्टूडेंट्स से भी सीखते हैं। हम समाज में हर किसी से अच्छा सीख सकते हैं।

उन्होंने कहा कि मेरा प्रयास हमेशा से यही था कि सबके मार्गदर्शन से अच्छे-अच्छे फूल उठाकर एक नया बुके बनाना। मैं अपने स्टूडेंट्स से भी यही बोलता हूं कि सब अपना-अपना स्टाइल बनाओ। मैं हमेशा बोलता हूं कि संगीत में वो ताकत है जो हमारे सच्चे हुनर को बाहर लाती है। संगीत हमारे अंदर की नकारात्मकता को खत्म कर देता है। संगीत शांति का संदेश देता है। संगीत लोगों को जोड़ता है।

–आईएएनएस

एमएस/डीकेपी


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