Monday, January 26, 2026

किंग चार्ल्स ने राष्ट्रपति मुर्मु को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी, भारत-ब्रिटेन संबंधों की सराहना की


लंदन, 26 जनवरी (आईएएनएस)। ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत सरकार और लोगों को अपनी और रानी कैमिला की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। इसके साथ ही उन्होंने दोनों देशों के बीच स्थायी और घनिष्ठ संबंधों की सराहना की।

राष्ट्रपति मुर्मु को लिखे पत्र में किंग ने भारत और ब्रिटेन के बीच पक्की साझेदारी की सराहना करते हुए कहा कि यह कॉमनवेल्थ को बताने वाले शेयर्ड वैल्यूज और आपसी सम्मान पर आधारित है। उन्होंने दुनिया भर में समझ, सहयोग और मौके को बढ़ावा देने में कॉमनवेल्थ मेंबर देशों की भूमिका पर भी गर्व जताया।

पत्र में लिखा गया, “कॉमनवेल्थ की रिच डायवर्सिटी और इसकी युवा जेनरेशन की एनर्जी उम्मीद और विकास को प्रेरित करती रहती है। वैश्विक अस्थिरता के इस समय में, हमारी कलेक्टिव स्ट्रेंथ और यूनिटी पहले से कहीं ज्यादा जरूरी है। मुझे बहुत खुशी है कि हमारे देश नवंबर में एंटीगुआ और बारबुडा में अगली कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट मीटिंग में एक साथ आएंगे, जहां हम अपने साझा कमिटमेंट्स की फिर से पुष्टि करेंगे और फ्यूचर के लिए एक कलेक्टिव विज़न सेट करेंगे।”

पत्र में आगे कहा गया, “मैं इस साल गर्मियों में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स का भी इंतजार कर रहा हूं और अहमदाबाद में 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स को सिक्योर करने के लिए आपको बधाई देता हूं।”

किंग चार्ल्स ने क्लीन एनर्जी इनिशिएटिव, क्लाइमेट फाइनेंस पर सहयोग, और क्लीन टेक्नोलॉजी और ग्रीन ग्रोथ पर इनिशिएटिव के ज़रिए क्लाइमेट और सस्टेनेबिलिटी में भारत-ब्रिटेन साझेदारी को गहरा करने का स्वागत किया। उन्होंने कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे इनिशिएटिव के जरिए भारत की इंटरनेशनल क्लाइमेट लीडरशिप की तारीफ की।

पत्र के अंत में लिखा था, “भारत इस जरूरी काम के लिए एक मजबूत वैश्विक आवाज है, और हमारा सहयोग एक खुशहाल, सुरक्षित और स्थिर दुनिया बनाने के साझा इरादे को दिखाता है। मैं और मेरी पत्नी आपको और भारत के सभी लोगों को आने वाले शांतिपूर्ण और खुशहाल साल की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देते हैं।”

भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, जो 1950 में संविधान को औपचारिक रूप से अपनाने और लागू करने की याद में है, जिसने देश के एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य में बदलाव को दिखाया। यह मौका संविधान में दिए गए न्याय, बराबरी, आज़ादी और भाईचारे के मुख्य सिद्धांतों को फिर से पक्का करता है।

–आईएएनएस

केके/एएस


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