Sunday, February 15, 2026

कुष्ठ रोग का 'बॉबी' ने किया डटकर मुकाबला, अमिताभ से आर माधवन तक करते हैं जागरूक


मुंबई, 22 जनवरी (आईएएनएस)। पर्दे पर चमक बिखेरने वाले कई सितारे सिर्फ ग्लैमर और स्टाइल के लिए नहीं जाने जाते, बल्कि उनकी जिंदगी की असली कहानियां भी लोगों को हिम्मत और उम्मीद देती हैं। ऐसी ही अभिनेत्री हैं डिंपल कपाड़िया। 1980 के दशक में फिल्म ‘बॉबी’ से रातों-रात सुपरस्टार बनने वाली डिंपल ने न सिर्फ बड़ी-बड़ी हीरोइनों के साथ कॉम्पिटिशन किया, बल्कि बचपन में ही कुष्ठ रोग से जूझकर जीवन की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ी।

12 साल की उम्र में उन्हें इस बीमारी का सामना करना पड़ा, जिसके कारण समाज ने उन्हें ताने दिए और अलग-थलग करने की कोशिश की। लेकिन डिंपल ने हार नहीं मानी। उन्होंने बीमारी का इलाज करवाया, पूरी तरह ठीक हुईं और फिर फिल्मों में धमाल मचाया। आज भी वह खुलकर अपनी इस कहानी को साझा करती हैं ताकि लोग समझें कि कुष्ठ रोग कोई शर्मिंदगी नहीं है, बल्कि एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज संभव है।

हर साल 23 जनवरी को कुष्ठ रोग के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाते हैं। इस दिन का मकसद लोगों को बताना है कि कुष्ठ रोग का इलाज संभव है और इससे पीड़ित लोगों के साथ भेदभाव या अलगाव नहीं करना चाहिए।

कुष्ठ रोग एक पुरानी संक्रामक बीमारी है, जो माइकोबैक्टीरियम लेप्री नामक बैक्टीरिया से होती है। इसकी खोज 1873 में नॉर्वेजियन वैज्ञानिक गेरहार्ड हैंसेन ने की थी, इसलिए इसे हैंसेन रोग भी कहते हैं। यह मुख्य रूप से त्वचा, नसों, हाथ-पैर और कभी-कभी आंखों पर असर करता है। शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर हल्के या लाल धब्बे, सुन्नपन, बालों का झड़ना और घाव शामिल होते हैं। अगर समय पर इलाज शुरू हो जाए तो यह पूरी तरह ठीक हो जाता है।

डिंपल कपाड़िया के अलावा, आर माधवन और अमिताभ बच्चन भी कुष्ठ रोग निवारण अभियान के लिए कदम उठा चुके हैं। इन एक्टर्स का मानना है कि आज की सबसे बड़ी चुनौती बीमारी से ज्यादा समाज का रवैया है। कुष्ठ रोग से ठीक हो चुके लोग सामान्य जीवन जी सकते हैं, लेकिन अक्सर उन्हें अकेलापन, तिरस्कार और भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

इन हस्तियों का मानना है कि कुष्ठ रोग अब डरावनी बीमारी नहीं रह गई, बल्कि एक ऐसी समस्या है, जिसका आसानी से इलाज संभव है। जरूरी है कि कलंक खत्म करें, प्रभावित लोगों को प्यार और सम्मान दें। प्रेम और समझदारी ही अकेलेपन और निराशा का सबसे अच्छा इलाज है।

अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया ने खुद इस बीमारी का सामना किया है। उन्होंने बताया था कि 12 साल की उम्र में उनकी कोहनी पर कुष्ठ रोग था। उस दौरान एक व्यक्ति ने उन पर तंज कसा और कहा कि स्कूल से निकाल दिया जाएगा। उस वक्त उन्हें शब्द का मतलब भी नहीं पता था। लेकिन, इसी मुश्किल समय में उन्हें फिल्म ‘बॉबी’ का मौका मिला। डिंपल बताती हैं कि कुष्ठ रोग की वजह से राज कपूर से मुलाकात हुई और ‘बॉबी’ मिली और यह उनके जीवन का सबसे जादुई और खास समय था। उन्होंने इस अनुभव को साझा करके दूसरों को हिम्मत दी कि यह बीमारी शर्मिंदगी का कारण नहीं है और इलाज के बाद सामान्य जीवन संभव है।

मेगास्टार अमिताभ बच्चन भी लंबे समय से कुष्ठ रोग के खिलाफ जागरूकता फैला रहे हैं। उन्होंने साल 2018 में निप्पॉन फाउंडेशन और डिसेबल्ड पीपल्स इंटरनेशनल द्वारा आयोजित वैश्विक अपील का समर्थन किया। अमिताभ ने बताया था कि हमें उस सामाजिक, आर्थिक और कानूनी भेदभाव से ऊपर उठना होगा जो कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों के साथ अभी भी होता है।

अभिनेता आर. माधवन भी इस विषय से गहराई के साथ जुड़े हैं। वह लेपरा इंडिया के सद्भावना दूत (गुडविल एंबेसडर) हैं। यह संगठन कुष्ठ रोग, तपेदिक, मलेरिया और अन्य बीमारियों के खिलाफ काम करता है। माधवन बताते हैं कि कुष्ठ रोग पूरी तरह इलाज योग्य है और किसी को भी इसके साथ जीवन नहीं जीना पड़ता। वह कई अभियानों के जरिए लोगों को जागरूक करते हैं कि समय पर जांच और इलाज से बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है।

–आईएएनएस

एमटी/एबीएम


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