महाराष्ट्र: भूमि अधिग्रहण के 28,000 से ज्यादा पेंडिंग मामलों के निपटारे के लिए 57 नए आर्बिट्रेटर नियुक्त


मुंबई, 28 मार्च (आईएएनएस)। नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स से जुड़े जमीन अधिग्रहण के लंबे समय से पेंडिंग झगड़ों को तेजी से निपटाने के लिए केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र में 57 नए आर्बिट्रेटर नियुक्त किए हैं।

इस फैसले से प्रोजेक्ट से प्रभावित लोगों के 28,000 से ज्यादा पेंडिंग क्लेम का निपटारा किया जाएगा, जो कई साल से अपने मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।

महाराष्ट्र के रेवेन्यू मिनिस्टर चंद्रशेखर बावनकुले ने शनिवार को कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देशों के बाद उन्होंने किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक खास पहल की है।

मंत्री बावनकुले ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकारों के बीच कई जॉइंट मीटिंग्स के बाद, जिसमें केंद्रीय सड़क परिवहन और हाईवे मंत्री नितिन गडकरी के साथ चर्चा भी शामिल है और रीजनल केस स्टडीज के आधार पर लगातार फॉलो-अप के बाद, इन अपॉइंटमेंट्स को फाइनल किया गया है।

उन्होंने कहा कि जबकि नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया के कई प्रोजेक्ट्स पूरे राज्य में चल रहे हैं। बढ़े हुए मुआवजे से जुड़े लगभग 28,000 मामले आर्बिट्रेशन में अटके हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि इनमें से कुछ मामले तीन साल से ज्यादा समय से पेंडिंग हैं।

ट्रांसपेरेंसी की जरूरत और प्रभावित लोगों के अधिकारों को समझते हुए मंत्री बावनकुले ने कहा कि उन्होंने जल्द सुनवाई पक्का करने के लिए इंडिपेंडेंट आर्बिट्रेटर पर जोर दिया।

इसके चलते एडिशनल कमिश्नर और एडिशनल कलेक्टर कैडर के 57 अनुभवी अधिकारियों को अब पूरे महाराष्ट्र में आर्बिट्रेटर के तौर पर नियुक्त किया गया है।

“ये अधिकारी कोंकण, पुणे, नासिक, छत्रपति संभाजीनगर, अमरावती और नागपुर समेत सभी डिवीजन में काम करेंगे। रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने डिस्ट्रिक्ट कलेक्टरों को एनएचएआई प्रोजेक्ट डायरेक्टर और लैंड एक्विजिशन ऑफिसर के साथ तुरंत मीटिंग करने का फॉर्मल निर्देश जारी किया है ताकि पेंडिंग केस इन नए आर्बिट्रेटर के बीच बांटे जा सकें।

मंत्री बावनकुले ने आगे कहा कि एडमिनिस्ट्रेटिव कंसिस्टेंसी पक्का करने के लिए एक ही अवॉर्ड से जुड़े सभी क्लेम एक ही अधिकारी को सौंपे जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि प्रोसेस को एफिशिएंट बनाए रखने के लिए डिविजनल कमिश्नरों को आर्बिट्रेटर की प्रोग्रेस का मंथली रिव्यू करने का काम सौंपा गया है।

एनएचएआई मैनपावर और ऑफिस खर्च के लिए जरूरी फंडिंग भी देगा, ताकि यह पक्का हो सके कि कानूनी प्रक्रिया में कोई लॉजिस्टिक रुकावट न आए।

बावनकुले ने कहा कि किसानों को मुआवजा मिलने में अक्सर जमीन अधिग्रहण के पेंडिंग दावों की वजह से देरी होती है, जिससे प्रोजेक्ट में भी देरी होती है। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए हमने इस मामले को केंद्र सरकार के सामने उठाया। 57 नए आर्बिट्रेटर की नियुक्ति के साथ ये 28,000 पेंडिंग मामले अब एक तय समय में हल हो जाएंगे।

उन्होंने कहा कि रेवेन्यू डिपार्टमेंट के इस फैसले से पुराने झगड़े सुलझेंगे। प्रोजेक्ट से प्रभावित लोगों को समय पर मुआवजा मिलेगा और राज्य का विकास तेज होगा।

–आईएएनएस

एसडी/वीसी


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