वॉशिंगटन, 15 मई (आईएएनएस)। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कॉलेज शिक्षा की बढ़ती लागत पर लगाम कसने के अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी बीच, शिक्षा सचिव लिंडा मैकमोहन ने कांग्रेस को बताया कि 4.3 करोड़ अमेरिकी वर्तमान में कुल 1.7 ट्रिलियन डॉलर के भारी छात्र ऋण का बोझ उठा रहे हैं।
लिंडा ने प्रतिनिधि सभा की शिक्षा और कार्यबल समिति के समक्ष पेश होकर व्यापक छात्र ऋण सुधारों का बचाव किया और कहा कि असीमित संघीय ऋण व्यवस्था ने पूरे देश में कॉलेज की फीस में भारी वृद्धि को बढ़ावा दिया है।
उन्होंने कहा, “हम पर 1.7 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज है और 4.3 करोड़ छात्र इससे प्रभावित हैं। कॉलेज की लागत कम करने के लिए हमें वास्तव में कुछ करना होगा।”
यह सुनवाई जल्द ही प्रशासन की उच्च शिक्षा सुधार योजना पर तीखी बहस में बदल गई। खासकर नर्सिंग, शिक्षण और सामाजिक कार्य जैसे कार्यक्रमों के लिए स्नातकोत्तर छात्रों के ऋण पर नई सीमाओं को लेकर। डेमोक्रेटिक नेताओं ने चेतावनी दी कि ये बदलाव कार्यबल की कमी को और बढ़ा सकते हैं और छात्रों को महंगे निजी ऋण लेने पर मजबूर कर सकते हैं।
कनेक्टिकट से प्रतिनिधि जो कर्टनी ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह ऐसे समय में उन्नत नर्सिंग शिक्षा को और महंगा बना रहा है, जब देश गंभीर स्वास्थ्यकर्मी कमी का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ स्नातकोत्तर नर्सिंग कार्यक्रम पहले ही नई संघीय ऋण सीमा से अधिक महंगे हैं।
मैकमोहन ने आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य विश्वविद्यालयों पर फीस कम करने का दबाव बनाना है।
उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य उच्च शिक्षा की लागत को कम करना है,” और बताया कि नए नियमों की घोषणा के बाद कुछ विश्वविद्यालयों ने स्नातकोत्तर कार्यक्रमों की फीस घटानी शुरू कर दी है।
मैकमोहन ने तर्क दिया कि संघीय ऋण नीतियों ने वर्षों तक कॉलेजों को बिना किसी नियंत्रण के फीस बढ़ाने की अनुमति दी। उन्होंने सांसदों से कहा, “विश्वविद्यालयों को मनमानी फीस वसूलने की छूट मिली हुई थी।”
शिक्षा सचिव ने संघीय छात्र सहायता प्रणाली में किए गए सुधारों को भी बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि नया एफएएफएसए आवेदन पहले से कहीं जल्दी शुरू किया गया है और अब इसे पूरा करने में कई दिनों के बजाय लगभग 35 मिनट लगते हैं।
उन्होंने सांसदों को बताया कि प्रशासन ने पहचान सत्यापन उपायों को मजबूत किया है और “घोस्ट स्टूडेंट्स” तथा एआई जनित फर्जी आवेदनों सहित 1 अरब डॉलर से अधिक की धोखाधड़ी वाली छात्र सहायता भुगतान को रोका है।
मैकमोहन ने कहा, “हमें कुछ संदिग्ध संकेत दिखाई देने लगे थे,” और बताया कि अधिकारियों ने आईपी एड्रेस तथा डुप्लीकेट फोटो आईडी के जरिए संदिग्ध आवेदनों की पहचान की।
समिति में रिपब्लिकन सदस्यों ने इन सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि छात्र ऋण प्रणाली में जवाबदेही बहाल करने के लिए ये जरूरी हैं। समिति अध्यक्ष टिम वालबर्ग ने कहा कि प्रशासन ने पुनर्भुगतान कार्यक्रमों को सरल बनाया है और उधारकर्ताओं की “जिम्मेदारी” वापस लाई है। उन्होंने इसे जो बिडेन काल की असफल ऋण माफी योजनाओं के बाद जरूरी कदम बताया।
हालांकि डेमोक्रेटिक नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन कम आय वाले अमेरिकियों की उच्च शिक्षा तक पहुंच कमजोर कर रहा है। मिनेसोटा से प्रतिनिधि इहान ओमर ने कहा कि नई ऋण सीमाएं छात्रों को शिक्षा सस्ती बनाने के बजाय निजी ऋण बाजार की ओर धकेलेंगी।
उन्होंने मैकमोहन से तीखी बहस के दौरान कहा, “आप अपना काम ठीक से नहीं कर रही हैं।”
यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब छात्र ऋण अमेरिका के सबसे बड़े आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों में से एक बना हुआ है, खासकर युवाओं के बीच, जो महंगाई, बढ़ती आवास लागत और लगातार बढ़ती ट्यूशन फीस से जूझ रहे हैं। जो बाइडन प्रशासन ने व्यापक छात्र ऋण माफी योजनाओं की कोशिश की थी लेकिन उनमें से कई कानूनी चुनौतियों और रिपब्लिकन विरोध का सामना कर रही हैं।
इस मुद्दे पर भारतीय छात्र भी करीबी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि वे अमेरिका में सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय छात्र समूहों में से एक हैं। संघीय ऋण नीतियों, स्नातकोत्तर कार्यक्रमों की वहनीयता और रोजगार-केंद्रित शिक्षा सुधारों में बदलाव का अमेरिका में उच्च शिक्षा और विशेष पेशेवर डिग्री हासिल करने वाले विदेशी छात्रों पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
–आईएएनएस
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