नई दिल्ली, 15 मार्च (आईएएनएस)। वियतनाम युद्ध के दौरान दक्षिण वियतनाम के एक छोटे से गांव ‘माई लाई’ में जो हुआ, उसने दुनिया को युद्ध का क्रूर चेहरा दिखाया। इस घटना को इतिहास में माई लाई नरसंहार के नाम से जाना जाता है और इसे 20वीं सदी के सबसे विवादास्पद युद्ध अपराधों में गिना जाता है।
16 मार्च 1968 को वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना को यह सूचना मिली थी कि माई लाई गांव में वियतकांग विद्रोही छिपे हुए हैं। इसी आधार पर अमेरिकी सेना की एक यूनिट, जिसे “चार्ली कंपनी” कहा जाता था, को वहां तलाशी अभियान चलाने के लिए भेजा गया। इस यूनिट का नेतृत्व विलियम कैले कर रहे थे।
जब सैनिक गांव पहुंचे तो उन्हें वहां कोई संगठित प्रतिरोध नहीं मिला। इसके बावजूद सैनिकों ने गांव के लोगों को घरों से बाहर निकालना शुरू किया और धीरे-धीरे स्थिति भयावह होती चली गई। प्रत्यक्षदर्शियों और बाद की जांच रिपोर्टों के अनुसार, सैनिकों ने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों समेत सैकड़ों निहत्थे ग्रामीणों पर गोलियां चला दीं। कई घरों को जला दिया गया और ग्रामीणों को समूहों में खड़ा कर गोली मारी गई।
बाद में सामने आए आंकड़ों के अनुसार इस घटना में लगभग 500 तक नागरिकों की मौत हुई। यह नरसंहार उस समय तुरंत सार्वजनिक नहीं हुआ। शुरुआत में अमेरिकी सेना ने इसे एक सफल सैन्य अभियान बताया, लेकिन कुछ सैनिकों और पत्रकारों की कोशिशों से सच्चाई धीरे-धीरे सामने आने लगी।
इस घटना को दुनिया के सामने लाने में अमेरिकी सैनिक ह्यू थॉमसन जूनियर की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। वे हेलीकॉप्टर से इलाके का निरीक्षण कर रहे थे और उन्होंने देखा कि निहत्थे ग्रामीणों पर गोलीबारी हो रही है। उन्होंने हस्तक्षेप किया और कुछ ग्रामीणों को बचाने की कोशिश भी की।
1969 में अमेरिकी पत्रकार सेमोर हेर्ष की रिपोर्ट के बाद यह घटना वैश्विक स्तर पर सुर्खियों में आई। इसके बाद अमेरिका में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और वियतनाम युद्ध को लेकर जनता की नाराजगी और बढ़ गई।
जांच के बाद कई सैनिकों के खिलाफ मुकदमा चलाया गया, लेकिन अंततः केवल विलियम कैली को दोषी ठहराया गया। उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, हालांकि बाद में सजा कम कर दी गई और वे कुछ वर्षों के भीतर ही रिहा हो गए।
–आईएएनएस
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