Supreme Court: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने एक बार फिर कॉलेजियम को लेकर अपनी बात मुखरता से रखी है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में एक भी नियुक्ति की जगह बची रहने को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता है. सीजेआई चंद्रचूड़ ने सेंटर फॉर रिसर्च एंड प्लानिंग (सीआरपी) को भविष्य में होने वाली नियुक्तियों के लिए संभावित नामों की लिस्ट तैयार करने में शामिल करने का एलान किया.
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि मेरे लक्ष्यों में से एक यह सुनिश्चित करना रहा है कि एक फुल स्ट्रेंथ वाला सुप्रीम कोर्ट कोई अपवाद नहीं, बल्कि एक नियमित विशेषता है. कॉलेजियम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक भी पद खाली रखने का कोई औचित्य या कारण नहीं है और भविष्य के लिए भी यही मेरा मिशन होगा. उन्होंने 11 अप्रैल को हुए एक कार्यक्रम में ये बात कही. बता दें कि इस साल सुप्रीम कोर्ट के 6 जस्टिस रिटायर होने वाले हैं.
सीआरपी करेगी सुप्रीम कोर्ट की मदद- सीजेआई
उन्होंने सीआरपी के सुप्रीम कोर्ट के सचिवालय की सहायता करने का एलान किया. जो न्यायिक नियुक्तियों के अलग-अलग पक्षों, जानकारी जुटाने, रिकॉर्ड्स तैयार करने और इन्हें कॉलेजियम के सामने पेश करने का काम करती है. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि सीआरपी को सुप्रीम कोर्ट के भविष्य के न्यायाधीशों के लिए देश के शीर्ष 50 जस्टिसों का डेटा इकट्ठा करने का निर्देश दिया गया है.
सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि ‘ये कभी नहीं हुआ था… तो अब हमारे पास शीर्ष 50 जस्टिसों की वरिष्ठता के आधार पर डेटा है. हमारे पास उनके दिए गए फैसले हैं, हमारे पास उनके वो फैसले हैं जो आगे बढ़ाने योग्य हैं. विचार यह है कि कॉलेजियम जो काम करता है उसमें निष्पक्षता की भावना को बढ़ावा देना है, इसलिए सीआरपी अब भारत के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के स्थायी सचिवालय के साथ अपनी गतिविधियां करेगा.’
पारदर्शिता के लिए बताते हैं कारण- जस्टिस चंद्रचूड़
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का सीआरपी को उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने की प्रक्रिया में शामिल करने का एलान केंद्र सरकार मांग पर आया है. तीन महीने पहले केंद्र सरकार ने एक पत्र लिखकर नियुक्तियों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक कमेटी बनाने की मांग की थी.
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कॉलेजियम सिस्टम में पारदर्शिता की कमी पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि कॉलेजियम के हिस्से के रूप में उनका जोर पारदर्शिता को बढ़ावा देने पर रहा है. जैसा कि आप सभी जानते हैं, हम जो प्रस्ताव पारित करते हैं उसके लिए हम वजहें बताते हैं… चाहे वह हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति के बारे में हो या चीफ जस्टिस की नियुक्ति या न्यायाधीशों के ट्रांसफर के बारे में हो.
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