पेनल्टी कॉर्नर में फ्लॉप शो भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए बनी मुसीबत


हांगझोऊ, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय महिला हॉकी टीम हांगझोऊ में 19वें एशियाई खेलों से कांस्य पदक लेकर स्वदेश लौटी। इसके बाद पेनल्टी कॉर्नर में टीम की नाकामी और कमजोरी की चर्चा तेज हो गई है।

टीम न केवल बड़ी संख्या में अर्जित पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलने में विफल रही, बल्कि उसने पेनल्टी कॉर्नर के माध्यम से कुछ गोल भी खाए।

एशियाई खेलों में खेले गए छह मैचों में, भारत ने 69 पेनल्टी कॉर्नर अर्जित किए और 23.18 प्रतिशत की सफलता दर के साथ उनमें से 16 को गोल में बदलने में सफल रही।

कुल मिलाकर भारत ने हांगझोऊ में खेले गए छह मैचों में 35 गोल किए। जिनमें से 17 फील्ड गोल, 16 पेनल्टी कॉर्नर के माध्यम से और दो पेनल्टी शॉर्ट के जरिए।

इसकी तुलना में स्वर्ण पदक विजेता चीन ने 77 पेनल्टी कॉर्नर अर्जित किए और उनमें से 20 को लगभग 26 प्रतिशत की थोड़ी बेहतर सफलता दर के लिए परिवर्तित किया।

भारत के लिए मेजबान चीन के खिलाफ सेमीफाइनल में समस्या और बढ़ गई जब उसने छह पेनल्टी कॉर्नर अर्जित किए लेकिन किसी को भी भुना नहीं सका। जापान के खिलाफ कांस्य पदक मैच में भारत को केवल एक के मुकाबले 11 पेनल्टी कॉर्नर मिले।

भारतीय महिला टीम के मुख्य कोच जेनेके शॉपमैन ने स्वीकार किया कि पेनल्टी कॉर्नर को गोल में न बदलना चिंता का विषय है, लेकिन उन्होंने कहा कि महिलाओं की हॉकी में भारतीयों की सफलता अंतर्राष्ट्रीय स्तर से ज्यादा दूर नहीं है।

भारतीय महिला हॉकी टीम 19वें एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने और अगले साल पेरिस में होने वाले ओलंपिक खेलों में जगह बनाने की बड़ी उम्मीदों के साथ पहुंची थी।

हालांकि, खिलाड़ियों के सपने साकार नहीं हुए और उन्हें कांस्य पदक के साथ घर लौटना पड़ा।

–आईएएनएस

एएमजे/एसकेपी


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