Friday, February 13, 2026

पीएम मोदी भारत में जिन नीतियों को प्रमोट कर रहे वे भारतीयों के लिए फायदेमंद हैं: इजरायली राजदूत


नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। इजरायल और हमास के बीच ट्रंप के 20 सूत्रीय समझौते के तहत दूसरे चरण की प्रक्रिया जारी है। ट्रंप की अध्यक्षता में इस बोर्ड में कई देश शामिल हो चुके हैं, वहीं कई देश अब भी इसमें शामिल होने के फैसले पर विचार कर रहे हैं। भारत उनमें से एक है।

इस बीच भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने आईएएनएस से खास बातचीत में बताया कि ट्रंप का 20 सूत्रीय संघर्ष विराम समझौता गाजा में कितना असरदार है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो वहां कैसे हालात होंगे। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक स्तर पर पीएम मोदी के नेतृत्व और प्रभाव को लेकर भी बातें की।

गाजा में संघर्ष विराम कितना असरदार है? इसपर इजरायली राजदूत रूवेन अजार ने आईएएनएस से कहा, “गाजा के लिए 20-सूत्रीय ट्रंप प्लान, मुझे लगता है कि इस समय हमारे पास गाजा में बाकी चुनौतियों को डिप्लोमैटिक तरीके से हल करने का सबसे अच्छा मौका है। जब मिलिट्री की बात आती है तो इजरायल ने काफी अच्छा काम किया है और हम हमास की ज्यादातर मिलिट्री मशीन को खत्म करने में कामयाब रहे हैं। हमने गाजा के आधे से ज्यादा इलाके पर कब्जा कर लिया है और इस 20-पॉइंट प्लान को अपनाकर, हमास डीमिलिटराइज करने के लिए तैयार है।”

उन्होंने आगे कहा, “हम चाहते हैं कि वे डिप्लोमैटिक तरीकों से डीमिलिटराइज करें। उन्हें यही करना है। बदकिस्मती से, अब वे इससे पीछे हट रहे हैं, लेकिन हमें भरोसा है कि अमेरिका और बोर्ड ऑफ पीस के देश हमास पर डीमिलिटराइज करने के लिए दबाव डालेंगे ताकि हम गाजा पट्टी के पुर्ननिर्माण में लग सकें, क्योंकि जब तक आतंकवादी संगठन उस जगह पर कब्जा बनाए रखेंगे और इलाके में स्थिरता के लिए खतरा बने रहेंगे, तब तक कोई भी गाजा पट्टी में निवेश करने के लिए राजी नहीं होगा।”

समझौते के हिसाब से हमास के हथियार डालने की शर्तों को लेकर रूवेन अजार ने कहा, “हम डिप्लोमेसी को एक मौका देना चाहते हैं। हमारा मानना ​​है कि हमास पर हथियार छोड़ने के लिए दबाव डालना न सिर्फ सही है, बल्कि यह एक अच्छा विकल्प भी है क्योंकि अगर यह फेल हो जाता है तो हमें वापस मिलिट्री सॉल्यूशन का सहारा लेना होगा, जिससे हम बचना चाहते हैं।”

हमास के गुर्गों को मार गिराने के पीछे इजरायल के कारणों को लेकर भारत में इजरायली राजदूत ने कहा, “बदकिस्मती से, समय-समय पर हमास येलो लाइन में घुसकर, हमारी सेना को कमजोर करने और उन पर हमला करके या अपनी क्षमताओं को फिर से बनाने की कोशिश करके सीजफायर तोड़ता रहता है और इजरायल सीजफायर की उस शर्त पर टिका हुआ है जो इस तरह की गतिविधि की इजाजत नहीं देती। इसलिए, जब हम ऐसी गतिविधियां देखते हैं, तो हम तुरंत कार्रवाई करते हैं।”

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार ईरान को हमले की धमकी दे चुके हैं। वहीं ईरान ने भी तगड़ा जवाब देने का ऐलान किया। अमेरिकी हमले को लेकर ईरान में हालात पर रूवेन अजार ने कहा, हमें अभी नहीं पता कि यह हमला होगा या नहीं। मुझे लगता है कि डिप्लोमेसी के जरिए बाकी चुनौतियों को सुलझाने की सच्ची कोशिश हो रही है। इजरायल ने साफ कहा है कि हम उन सभी क्षमताओं को खत्म करने की मांग करते हैं जो ईरान ने इजरायल को खत्म करने के लिए बनाई हैं। उन्होंने ऐसा करने की कसम खाई है।

इजरायली राजदूत ने कहा कि उस प्लान को पूरा करने के लिए ईरान ने जो भी तरीके बनाए हैं, उन्हें खत्म करना होगा, यानी मुख्य रूप से उनका मिलिट्री न्यूक्लियर प्रोग्राम, बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम, और उनके प्रॉक्सी, आतंकवादी संगठनों को उनका समर्थन जो मिडिल ईस्ट के अलग-अलग हिस्सों से लगातार इजरायल पर हमला कर रहे हैं।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर उन्होंने कहा कि यह एक बहुत जरूरी डेवलपमेंट है, क्योंकि भारत जितना ज्यादा खुलेगा, आर्थिक सहयोग के उतने ही ज्यादा मौके मिलेंगे। इजरायल भी अमेरिकी बाजार से बहुत जुड़ा हुआ है। हमें अपने विदेशी निवेश का लगभग 80 फीसदी अमेरिका से मिलता है और इजरायल अमेरिका के बाहर सबसे बड़ा इनोवेशन हब है। यही वजह है कि जब सिस्टम खुलता है, तो यह इजरायली, भारतीय और अमेरिकी कंपनियों के लिए एक साथ काम करने के ज्यादा मौके बनाता है।

वैश्विक स्तर पर पीएम मोदी के नेतृत्व और प्रभाव को लेकर इजरायली राजदूत ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत में जिन नीतियों को प्रमोट कर रहे हैं, वे भारतीय लोगों के लिए बहुत फायदेमंद रही हैं। सच तो यह है कि करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आ गए हैं। सच तो यह है कि यह देश बहुत तेजी से बन रहा है। सच तो यह है कि आपके पास सस्टेनेबल ग्रोथ है जो नए उद्योग बना रही है, इनोवेशन कर रही है, एकेडमिक रिसर्च कर रही है। यह हमारे लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि हम लोकतंत्र, मुक्त व्यापार, बोलने की आजादी के मूल्यों को साझा करते हैं और जितना भारत मजबूत होगा, इजरायल भी उतना ही मजबूत होगा।”

–आईएएनएस

केके/एएस


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